Suryakant Tripathi Nirala Biography In Hindi > सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हिंदी साहित्य के छायावाद के प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। वह एक महत्वपूर्ण छायावादी कवि, लेखक, उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार और संपादक थे। हालांकि, उनकी कविताओं ने उन्हें सबसे अधिक लोकप्रियता दिलाई। इसके अलावा, उन्होंने कई चित्र भी बनाए। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला को प्रगतिवाद, प्रयोगवाद और नई काव्य धारा का जनक भी माना जाता है, जो उनके साहित्यिक योगदान को और भी विशिष्ट बनाता है
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म 21 फरवरी 1899 को बंगाल के महिषादल रियासत में हुआ था, जो पश्चिम बंगाल में स्थित है। उनके पिता पंडित रामसहाय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के तारकोल गांव के निवासी थे, लेकिन वह बंगाल में सफाई की नौकरी करते थे। निराला की मां का निधन तब हुआ जब वह केवल 3 वर्ष के थे, और बाद में उनके पिता का भी देहांत हो गया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बंगाली माध्यम में गांव से हुई थी, और उन्होंने हाई स्कूल की परीक्षा पास की। उन्होंने घर पर ही हिंदी, अंग्रेजी, और संस्कृत का अध्ययन किया।
15 वर्ष की आयु में निराला का विवाह मनोरमा देवी से हुआ, और उनकी प्रेरणा से ही वह हिंदी कविताएं लिखने लगे। लेकिन दुर्भाग्यवश, उनकी पत्नी का भी अल्पायु में निधन हो गया। 1918 में उन्होंने नौकरी शुरू की और महिषादल राज्य में कार्य किया, जहाँ उन्होंने 1922 तक अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने संपादन के क्षेत्र में कदम रखा और 1922 में कोलकाता से प्रकाशित पत्रिका समन्वय का संपादन किया। 1923 में उन्होंने माधुरी पत्रिका के संपादक मंडल में भी कार्य किया।
उनकी नियुक्ति गंगा पुस्तक माला के कार्यक्रम में भी हुई, जहाँ वह 1935 तक मासिक पत्रिका सुधा से जुड़े रहे। इसके बाद 1935 से 1940 तक उन्होंने लखनऊ में रहते हुए स्वतंत्र लेखन का कार्य किया
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला साहित्यिक जीवन एवं काव्य
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने अपने जीवन में अनेक कविताएं, उपन्यास और निबंध लिखे। उनकी पहली कविता “जन्मभूमि” 1920 में प्रकाशित हुई थी। इसके बाद 1923 में उनका प्रसिद्ध काव्य संग्रह “अनामिका” प्रकाशित हुआ, जिसमें उनके पहले निबंध को बंगाली भाषा में प्रस्तुत किया गया था। हिंदी साहित्य में निराला को मुक्त छंद का प्रवर्तक माना जाता है।
निराला ने अपने समकालीन कवियों से अलग हटकर कल्पना का बहुत कम सहारा लिया और यथार्थ को प्रमुखता दी। उनकी कविताओं में विषयों की विविधता और नवीन प्रयोगों की झलक देखने को मिलती है। उनकी रचनाओं में रहस्यवाद, राष्ट्रप्रेम, संघर्ष, प्रकृति प्रेम, सामाजिक भेदभाव का विरोध, गरीबों के प्रति सहानुभूति और पाखंड पर व्यंग्य शामिल हैं।
निराला के काव्य की एक खास विशेषता यह रही है कि उन्होंने खड़ी बोली को साहित्य में प्रतिष्ठा दिलाई। उनकी कविता की भाषा शैली में संगीतमयता और ओजस्विता का अद्भुत मेल देखने को मिलता है, जो उनके रचनात्मक योगदान को और अधिक प्रभावशाली बनाता है
Kavi Nirala ka janm hua tha
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म 21 फरवरी 1896 को बंगाल के मिदनापुर जिले के महिषादल में हुआ था। निराला हिंदी साहित्य के प्रमुख छायावादी कवियों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध और साहित्य के अन्य विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसके लिए आज भी उन्हें हिंदी साहित्य में आदर और स्मरण के साथ याद किया जाता है
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविताएं
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हिंदी साहित्य के महान कवियों में से एक थे, जिनकी कविताएं और विचार सामाजिक और मानवीय मुद्दों से भरपूर थीं। उनकी कुछ प्रमुख रचनाएं इस प्रकार हैं:
- बाहर तोड़ती पत्थर: यह कविता समाज में गरीबों की कठिनाइयों और उनके संघर्षपूर्ण जीवन को दर्शाती है। इसमें एक पत्थर तोड़ती महिला का चित्रण है, जो जीवन की कठोर परिस्थितियों का सामना करते हुए संघर्षरत रहती है।
- राम की शक्ति पूजा: यह निराला की सबसे प्रसिद्ध कविताओं में से एक है, जो रामायण के प्रसंग पर आधारित है। इसमें भगवान राम के मानसिक संघर्ष और शक्ति के प्रति उनकी आस्था को दर्शाया गया है।
- बच्चों के: इस कविता में समाज के उन बच्चों का वर्णन है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और समाज द्वारा उपेक्षित हैं। इसमें बच्चों की स्थिति और उनकी संवेदनाओं को उजागर किया गया है, साथ ही उनके जीवन के संघर्षों को भी व्यक्त किया गया है।
- जागो फिर एक बार: यह एक प्रेरणादायक कविता है, जिसमें लोगों को जागरूक होकर अन्याय के खिलाफ खड़े होने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का संदेश दिया गया है।
- सरोज स्मृति: यह कविता निराला की बेटी सरोज के प्रति उनकी गहरी भावनाओं को व्यक्त करती है। इसमें एक पिता के दुख और पीड़ा को बहुत संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
- तोड़ती पत्थर: यह कविता भी एक संघर्षशील महिला के जीवन को दर्शाती है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद जीवन की चुनौतियों का सामना कर रही है। इसमें जीवन की कठोरता और संघर्ष का मार्मिक चित्रण है।
Jago fir ek bar kavita mein kaun sa bhav hai
Suryakant Tripathi Nirala Biography In Hindi final word
दोस्तों, हमने इस आर्टिकल में Suryakant Tripathi Nirala Biography In Hindi के बारे में पूरी जानकारी विस्तार से प्रस्तुत की है। अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया और इससे आप सूर्यकांत त्रिपाठी निराला से संबंधित सारी जानकारी प्राप्त कर पाए हैं, तो कृपया इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। हमें कमेंट करके जरूर बताएं कि आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगा। धन्यवाद










